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Tuesday, December 13, 2011

निरंतर कह रहा .......: ना ज़मीं तेरी ना आस्मां तेरा ,तूं इक मुसाफिर यहाँ

निरंतर कह रहा .......: ना ज़मीं तेरी ना आस्मां तेरा ,तूं इक मुसाफिर यहाँ: ना ज़मीं तेरी ना आस्मां तेरा तूं इक मुसाफिर यहाँ फिर क्यूं करता है तेरा मेरा देखता है सपने निरंतर रखता है इच्छाएं अपार पालता है बैर मन में...

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