मेरा मन कुछ कहता है, निरंतर मष्तिष्क को झंझोड़ता है, विचारों के मंथन से नए विचार आते हैं , उनकी अभिव्यक्ती कर रहा हूँ, आवश्यक नहीं है कि पाठक मेरे विचारों से सहमत हो(सर्वाधिकार सुरक्षित )
Tuesday, June 26, 2012
निरंतर कह रहा .......: मेरी आत्मा
निरंतर कह रहा .......: मेरी आत्मा: शरीर की कितनी पडतों के नीचे दबी है मेरी आत्मा मुझे पता नहीं शरीर में कहाँ छुपी है मेरी आत्मा मुझे पता नहीं इतना अवश्य पता...
Monday, June 25, 2012
निरंतर कह रहा .......: क्यों कहते,तुम अकेले हो
निरंतर कह रहा .......: क्यों कहते,तुम अकेले हो: क्यों कहते,तुम अकेले हो किसी के साथ कोई नहीं होता तुम कहते तुम अकेले हो हर तरह के इंसान मिलते जीवन में जो हँसाते भी हैं रुल...
निरंतर कह रहा .......: कौन कहता है?, आग पानी का साथ नहीं हो सकता
निरंतर कह रहा .......: कौन कहता है?, आग पानी का साथ नहीं हो सकता: कौन कहता है ? आग पानी का साथ नहीं हो सकता मैं सबूत हूँ नफरत भरे रिश्तों की आग में भी जीवित रहा समस्याओं की कसौटी पर खरा उतर...
निरंतर कह रहा .......: कितनी नाव,कितने मांझी बदलोगे
निरंतर कह रहा .......: कितनी नाव,कितने मांझी बदलोगे: कितनी नाव कितने मांझी बदलोगे कितने दोस्त कितने साथी बदलोगे अब अपनी इस फितरत को विराम मचलते मन को विश्राम दे दो ज़िन्द...
निरंतर कह रहा .......: इच्छाओं की कस्तूरी
निरंतर कह रहा .......: इच्छाओं की कस्तूरी: इच्छाओं की कस्तूरी मनमोहिनी सुगंध से मुझे निरंतर लुभाती संतुष्टी के पथ से डिगाने का निष्फल प्रयत्न करती मेरे संयम की बार बा...
निरंतर कह रहा .......: पुराने हो गए हैं,तो क्या बदल दोगे
निरंतर कह रहा .......: पुराने हो गए हैं,तो क्या बदल दोगे: पुराने हो गए हैं तो क्या बदल दोगे कूडा समझ कर फैंक दोगे ये भी तो सोच लो नया कहाँ से लाओगे तुम कह दोगे नए की ज़रुरत ही नहीं...
Tuesday, June 5, 2012
निरंतर कह रहा .......: खाई है चोट अगर
निरंतर कह रहा .......: खाई है चोट अगर: खाई है चोट अगर तो रोते क्यूं हो फिर ना भुगतो दोबारा कुछ ऐसा करो जहन के दरवाज़े खुले रखो खुद भी अन्दर झाँक कर देख लो क...
निरंतर कह रहा .......: हर हाल में संतुष्ट रहते
निरंतर कह रहा .......: हर हाल में संतुष्ट रहते: गोधुली वेला में गाँव की सड़क पर शहर की ओर अग्रसर था गाय बैलों का रेवड़ गाँव की तरफ लौट रहा था पैरों से उडी धूल ने नाक आँख...
निरंतर कह रहा .......: राह मुश्किल हो गयी तो क्या चलना बंद कर दूं
निरंतर कह रहा .......: राह मुश्किल हो गयी तो क्या चलना बंद कर दूं: राह मुश्किल हो गयी तो क्या चलना बंद कर दूं गिर गया तो क्या उठूँ नहीं जो चलेगा वही तो गिरेगा उठेगा नहीं तो मंजिल पर ...
निरंतर कह रहा .......: दिल जीतने के लिए
निरंतर कह रहा .......: दिल जीतने के लिए: मीठी बातें मुस्कराता चेहरा ही काफी नहीं होता किसी को लुभाने के लिए साथ हँसना पड़ता साथ रोना पड़ता विश्वास जीतने के लिए लेन...
निरंतर कह रहा .......: मैं अनपढ़ ही ठीक हूँ
निरंतर कह रहा .......: मैं अनपढ़ ही ठीक हूँ: मैं कभी स्कूल नहीं गया किताब का एक अक्षर भी कभी नहीं पढ़ा लोगों को बोलते देखा जो अच्छा लगा उसका अनुसरण कर लिया जो अच्छा नह...
Monday, June 4, 2012
निरंतर कह रहा .......: मैं अनपढ़ ही ठीक हूँ
निरंतर कह रहा .......: मैं अनपढ़ ही ठीक हूँ: मैं कभी स्कूल नहीं गया किताब का एक अक्षर भी कभी नहीं पढ़ा लोगों को बोलते देखा जो अच्छा लगा उसका अनुसरण कर लिया जो अच्छा नह...
Sunday, June 3, 2012
निरंतर कह रहा .......: बहुत कुछ सहना होता है ,दिल जीतने के लिए
निरंतर कह रहा .......: बहुत कुछ सहना होता है ,दिल जीतने के लिए: मीठी बातें मुस्कराता चेहरा ही काफी नहीं होता किसी को लुभाने के लिए साथ हँसना पड़ता साथ रोना पड़ता विश्वास जीतने के लिए ल...
निरंतर कह रहा .......: कैसे हाँ कहूँ ? जब ना कहना चाहता हूँ ?
निरंतर कह रहा .......: कैसे हाँ कहूँ ? जब ना कहना चाहता हूँ ?: कैसे हाँ कहूँ ? जब ना कहना चाहता हूँ ? पर ना भी कैसे कहूँ ? समझ नहीं पाता हूँ झंझावत में फंसा हूँ रिश्तों के बिगड़ने का खौफ दु...
निरंतर कह रहा .......: सब आँखें बंद कर चल रहे हैं
निरंतर कह रहा .......: सब आँखें बंद कर चल रहे हैं: सब आँखें बंद कर चल रहे हैं फिर भी गिरने से डर रहे हैं सुकून की तलाश में नफरत के शोले भड़का रहे हैं काँटों की डगर क...
निरंतर कह रहा .......: ये कैसी ज़िन्दगी?
निरंतर कह रहा .......: ये कैसी ज़िन्दगी?: ये कैसी ज़िन्दगी? जिसमें रंग नहीं खुशी नहीं गले मिल कर हँसना नहीं मिलजुल कर रहना नहीं कल क्या होगा? कल क्या करना है? ...
निरंतर कह रहा .......: घर की खामोशी
निरंतर कह रहा .......: घर की खामोशी: घर की खामोशी हर पल दिल को चीरने लगी आपस में कलह साफ़ दिखने लगी सुबह को ही शाम होने लगी एक दूसरे पर ऊंगली उठने लगी प...
निरंतर कह रहा .......: उजड़ गयी जब फसल सारी
निरंतर कह रहा .......: उजड़ गयी जब फसल सारी: उजड़ गयी जब फसल सारी तुम पूछते खलिहान कहाँ है बिखर चुका जब परिवार सारा तुम पूछते घर कहाँ है खुद गए रास्ते में गडडे अब...
निरंतर कह रहा .......: आज फिर ज़ख्म हरे हो गए
निरंतर कह रहा .......: आज फिर ज़ख्म हरे हो गए: आज फिर ज़ख्म हरे हो गए वो हमारे सामने से निकल गए देख कर भी अनदेखा कर गए अपनी तंगदिली पर मोहर लगा गए ये ज़रूरी नहीं है ...
Tuesday, May 29, 2012
निरंतर कह रहा .......: माँ ही जननी,माँ ही पोषक
निरंतर कह रहा .......: माँ ही जननी,माँ ही पोषक: माँ ही जननी माँ ही पोषक माँ ही रक्षक माँ ही पथ प्रदर्शक माँ स्नेह सरिता माँ करूणा का सागर माँ का आशीष पारस मणी माँ ...
निरंतर कह रहा .......: सृजन और विध्वंस
निरंतर कह रहा .......: सृजन और विध्वंस: किस्मत मिट्टी की अच्छी या खराब निर्भर करेगा उस पर जिसके के हाथों में जायेगी मिट्टी जिसकी जैसी नियत वैसा ही करेगा वो एक बनाए...
निरंतर कह रहा .......: क्रोध पर कविता -मैं नहीं कहता तुम मेरी मानो
निरंतर कह रहा .......: क्रोध पर कविता -मैं नहीं कहता तुम मेरी मानो: मैं नहीं कहता तुम मेरी मानो पर ध्यान से सुन तो लो मुझे प्रतीत होता है तुम्हें क्रोध बहुत आता है आवेश में जो नहीं कहना चाहि...
निरंतर कह रहा .......: खुदा से पूछा मैंने एक दिन
निरंतर कह रहा .......: खुदा से पूछा मैंने एक दिन: खुदा से पूछा मैंने एक दिन क्यूं ज़मीं पर बसेरा नहीं बसाया उसने खुदा ने जवाब दिया इंसान के दिल से नफरत साफ़ करते करते छा...
निरंतर कह रहा .......: भ्रूण ह्त्या पर कविता-मुझे जन्म तो लेने दो
निरंतर कह रहा .......: भ्रूण ह्त्या पर कविता-मुझे जन्म तो लेने दो: मुझे जन्म तो लेने दो संसार को देखने तो दो वैसे ही बहुत कुछ सहना होगा लपलपाती नज़रों से खुद को बचाना होगा पुरुषों का तिरिस्कार...
निरंतर कह रहा .......: लक्ष्य की और
निरंतर कह रहा .......: लक्ष्य की और: कोई हाथ पकड़ता है कोई पैर खींचता है कोई बातों से विचलित करने की कोशिश तो कोई अवरोध खड़े करता हैं चारों तरफ से मुझे पथ से ...
निरंतर कह रहा .......: कौन कहता है ऊंचे पहाड़ों पर घास के मैदान नहीं होते...
निरंतर कह रहा .......: कौन कहता है ऊंचे पहाड़ों पर घास के मैदान नहीं होते...: कौन कहता है ऊंचे पहाड़ों पर घास के मैदान नहीं होते ऊंचे लोग धरातल से जुड़े नहीं होते हुए हैं इस देश में नेता गाँधी , सुभाष प...
निरंतर कह रहा .......: बिना भावनाओं के जीवन
निरंतर कह रहा .......: बिना भावनाओं के जीवन: कोई पंछी ना उड़ता सितारा ना जगमगाता चाँद बादलों के पीछे छुपा रहता सूरज कभी ना उगता तो आकाश को कौन पूछता विशाल और विस्त...
निरंतर कह रहा .......: कैक्टस
निरंतर कह रहा .......: कैक्टस: अनंत काल से कालजयी मुस्कान लिए मरुधर में निश्चल खडा हूँ धूल भरी आँधियों से अकेला लड़ रहा हूँ लड़ते हुए भी हरीतिमा का ...
Saturday, May 12, 2012
उस से नाम पूछा ,उसने बता दिया
उस से नाम पूछा
उसने बता दिया
माँ,बाप का नाम पूछा
चुप रहा
जाती, धर्म पूछा
चुप रहा
गाँव,शहर पूछा
चुप रहा
फिर धीरे से बोला
आज तक किसी से
कहा नहीं
आज तुमको कहता हूँ
नफरत किसी से
रखता नहीं
धरती को माँ,
देश को पिता,
इंसानियत को धर्म
मानता हूँ
अनाथ होते हुए भी
खुद को अनाथ नहीं
मानता हूँ
इंसान की जात हूँ
सम्मान से जीता हूँ
निरंतर यही पैगाम
देता हूँ
20-01-2001
Sunday, May 6, 2012
निरंतर कह रहा .......: कुंठा की अभिव्यक्ती
निरंतर कह रहा .......: कुंठा की अभिव्यक्ती: प्रेम , प्यार , मोहब्बत तुम कहते हो खामोश रहूँ आंसू ना बहाऊँ भावनाओं को खुले आम ना दर्शाऊँ तो , क्या ग़मों को पीता रहूँ उनका...
Wednesday, May 2, 2012
निरंतर कह रहा .......: सृजन और विध्वंस
निरंतर कह रहा .......: सृजन और विध्वंस: किस्मत मिट्टी की अच्छी या खराब निर्भर करेगा उस पर जिसके के हाथों में जायेगी मिट्टी उसकी जैसी नियत वैसा ही करेगा वो एक ब...
निरंतर कह रहा .......: झूठ का आवरण
निरंतर कह रहा .......: झूठ का आवरण: किसी ने तुम्हारे प्रशंसा में दो मीठे शब्द बोल दिए , तुम पचा नहीं पाए फूल कर कुप्पा गए बिना यह सोचे समझे कहने वाले का मंतव्य क्या था क्या व...
निरंतर कह रहा .......: क्रोध पर कविता -मैं नहीं कहता तुम मेरी मानो
निरंतर कह रहा .......: क्रोध पर कविता -मैं नहीं कहता तुम मेरी मानो: मैं नहीं कहता तुम मेरी मानो पर ध्यान से सुन तो लो मुझे प्रतीत होता है तुम्हें क्रोध बहुत आता है आवेश में जो नहीं कहना चाहि...
निरंतर कह रहा .......: जी का वन ही तो जीवन है
निरंतर कह रहा .......: जी का वन ही तो जीवन है: जीवन के सृजन कर्ता से पूछा मैंने एक दिन क्यों आपने संसार में सांस लेने वालों का नाम जीव रखा वो मुस्कारा कर बोला जी का व...
Friday, April 20, 2012
निरंतर कह रहा .......: नींद मानो रूठ कर बैठ गयी
निरंतर कह रहा .......: नींद मानो रूठ कर बैठ गयी: रात नींद को बुलाता रहा करवटें बदलता रहा पर नींद मानो रूठ कर बैठ गयी , बहुत कशमकश और मिन्नतों के बाद भी नहीं आयी जब आयी तो मुझे पता ही...
निरंतर कह रहा .......: मेरे ह्रदय के रक्त का रंग कैसा है
निरंतर कह रहा .......: मेरे ह्रदय के रक्त का रंग कैसा है: जानना चाहता था मेरे ह्रदय के रक्त का रंग कैसा है छुरी हाथ में लेकर उसे चीर दिया देखा तो पाया रक्त आधा लाल आधा काला था समझ गया काला रक्त घ...
निरंतर कह रहा .......: मन की कशमकश
निरंतर कह रहा .......: मन की कशमकश: मैं सोचता रहता हूँ मन की कशमकश कह नहीं पाता तुम भी सोचती रहती हो कह नहीं पाती हो हमारी खामोशी बीच की दूरियां बढ़ा रही है ना कहने की मजबू...
Thursday, April 19, 2012
निरंतर कह रहा .......: खूबसूरत आवरण
निरंतर कह रहा .......: खूबसूरत आवरण: किताबों की दूकान में घुसते ही शो केस में लगी रंग बिरंगे खूबसूरत आवरण वाली किताब पर नज़रें अटक गयी जब आवरण इतना खूबसूरत किताब भी बहुद सुन्...
निरंतर कह रहा .......: क्यों बेफिक्र हो जाते हो ?
निरंतर कह रहा .......: क्यों बेफिक्र हो जाते हो ?: क्यों बेफिक्र हो जाते हो ? जब जब चलता है सब ठीक ठाक हँसते हो खिलखिलाकर भूल जाते हो आते हैं अवरोध सबके जीवन में जब दिए हैं इश्वर ने आँखों...
"निरंतर" की कलम से.....: शक का प्यार में कोई स्थान नहीं होता
"निरंतर" की कलम से.....: शक का प्यार में कोई स्थान नहीं होता: सूरत और बातों से प्यार नहीं होता जिस्म की भूख मिटाना आँखों में आँखें डाल हाथ में हाथ पकड़ना इक दूजे को निहारना प्यार नहीं होता ...
Wednesday, April 18, 2012
निरंतर कह रहा .......: क्यों बेफिक्र हो जाते हो ?
निरंतर कह रहा .......: क्यों बेफिक्र हो जाते हो ?: क्यों बेफिक्र हो जाते हो ? जब जब चलता है सब ठीक ठाक हँसते हो खिलखिलाकर भूल जाते हो आते हैं अवरोध सबके जीवन में जब दिए हैं इश्वर ने आँखों...
निरंतर कह रहा .......: कल का कल देखा जाएगा
निरंतर कह रहा .......: कल का कल देखा जाएगा: कभी सोचता आज कल जैसा ना हो कभी मन कहता आज जैसा कल ना हो जो आज सोचता कल नहीं सोचा था जो परसों सोचा था कल नहीं सोचा समझ नहीं आता हर दिन सोच...
निरंतर कह रहा .......: भीड़ के साथ भागता रहा
निरंतर कह रहा .......: भीड़ के साथ भागता रहा: निरंतर दौड़ता रहा भीड़ के साथ भागता रहा मन में व्यथित होता रहा जीवन आनंद ना ले सका धन वैभव को सब कुछ समझता रहा कितना सही कितना...
Tuesday, April 17, 2012
Nirantar's.......: When hope starts dying
Nirantar's.......: When hope starts dying: When hope starts dying Sadness arrives Confidence nosedives One feels weak and tired Thoughts become scary Life becomes boring One feels lo...
निरंतर कह रहा .......: आज इतना हँसो
निरंतर कह रहा .......: आज इतना हँसो: आज इतना हँसो कि हँसी तुमसे खुद पूछे तुम्हें हुआ क्या है ? क्या बात हुयी ऐसी जो दिल इतना खुश है क्यूं छिपा कर रखा है ? मुझे भी बता दो वो रा...
निरंतर कह रहा .......: माँ की चिंता
निरंतर कह रहा .......: माँ की चिंता: सर्दी की रात थी घड़ी की सूइयां बारह बजा रही थी दोस्तों की महफ़िल सजी थी घर जाने की ज़ल्दी ना थी माँ बेसब्री से इंतज़ार करती होगी जानते हुयी...
निरंतर कह रहा .......: चाटुकारिता का तर्पण अर्पण
निरंतर कह रहा .......: चाटुकारिता का तर्पण अर्पण: जीवन में कष्ट और मृत्यु के भय से चाटुकारिता का तर्पण अर्पण इश्वर को याद करना व्यर्थ है इश्वर को पाना है तो उसे मन में बसाओ कथनी करनी में वि...
निरंतर कह रहा .......: क्या यह प्यार नहीं है ?
निरंतर कह रहा .......: क्या यह प्यार नहीं है ?: कैसे कह दिया तुमने ? मैं तुम्हें प्यार नहीं करता तुम्हें गले नहीं लगाता तुम्हें चूमता नहीं हूँ अपनी बाहों में नहीं लेता तुम्हारे करीब नहीं...
निरंतर कह रहा .......: शांती भी नतमस्तक हो जायेगी
निरंतर कह रहा .......: शांती भी नतमस्तक हो जायेगी: किसी ने कहा मुझसे जब अपनों को अपनाओगे शान्ति वहीँ पा जाओगे कितना भ्रम है मन को खुश रखने का साधन है किस को मिली है शांती जो तुम्हें मिल जाय...
निरंतर कह रहा .......: आओ ज़िन्दगी के सांवले चेहरे को निखारा जाए
निरंतर कह रहा .......: आओ ज़िन्दगी के सांवले चेहरे को निखारा जाए: आओ ज़िन्दगी के सांवले चेहरे को निखारा जाए क्यों अमावस की रात में चाँद उगाया जाए भूखे को रोटी प्यासे को पाना पिलाया जाए पड़ोसी के साथ मिल कर...
निरंतर कह रहा .......: मैंने चाँद से पूछा,आकाश कितना बड़ा है
निरंतर कह रहा .......: मैंने चाँद से पूछा,आकाश कितना बड़ा है: मैंने चाँद से पूछा आकाश कितना बड़ा है चाँद बोला पता नहीं मैंने भी सूरज से पूछा था उसने भी यही कहा मुझे पता नहीं नन्ही चिड़िया ने वार्तालाप...
निरंतर कह रहा .......: नए को जानने से पहले
निरंतर कह रहा .......: नए को जानने से पहले: जिन्हें कल जानता था उनमें से कुछ याद रहे कुछ को भूल गया आज तक नहीं जानता था जिन्हें कल जानूंगा उन्हें कुछ याद रहेंगे कुछ को भूल जाऊंगा कैस...
Friday, April 13, 2012
घमंड
घमंड मनुष्य के व्यक्तित्व का
अभिन्न अंग है
किसी में अधिक किसी में कम
पर इसका स्तर
व्यक्ति के सोच पर निर्भर है
दूसरों के प्रति असम्मान नहीं हो ,
किसी को व्यथित नहीं करे,
स्वयं को मानसिक,
शररीरिक हानी नहीं हो
तो थोड़ा घमंड
विशेष कर अगर सिद्धांत को
लेकर हो
तो अनुचित नहीं मानता
कई बार सिद्धान्वादी
लोगों को भी
लोग घमंडी कहते हैं
प्रभुता महत्त्व,और पद पा कर
मनुष्य
अवश्य ही गौरव का अनुभव
करता है,
कई बार वह घमंड की
सीमा तक पहुँच जाता है,
पर उसका सीमांकन भी
आसान नहीं है,
उचित और अनुचित में
बहुत महीन रेखा होती है
13-04-2012
निरंतर कह रहा .......: अँधेरे में भी रोशनी निरंतर मेरे साथ रहती
निरंतर कह रहा .......: अँधेरे में भी रोशनी निरंतर मेरे साथ रहती: आज भी दिन भर दिमाग में कोई ना कोई उधेड़बुन चलती रही खुद से सवाल किया क्या ज़िन्दगी ऐसे ही चलती रहेगी ? मन की आस फिर भी टूटी नहीं बिस्तर पर ल...
निरंतर कह रहा .......: ज़िन्दगी ने हमें सताया बहुत
निरंतर कह रहा .......: ज़िन्दगी ने हमें सताया बहुत: ज़िन्दगी ने हमें सताया बहुत हँसते हुए को रुलाया बहुत हमने भी उसे छकाया बहुत वो गिराने की कोशिश करती रही हमें लंगडी लगाती रही हमने भी हा...
निरंतर कह रहा .......: अच्छे के साथ
निरंतर कह रहा .......: अच्छे के साथ: अच्छे के साथ छात्र के जन्म दिन पर शिक्षक ने गुलाब के फूल की टहनी भेंट की छात्र बोला गुरूजी इसमें कांटे लगे हैं हाथ में चुभेंगे शिक्षक ने ...
Wednesday, April 11, 2012
"निरंतर" की कलम से.....: अच्छे के साथ
"निरंतर" की कलम से.....: अच्छे के साथ: छात्र के जन्म दिन पर शिक्षक ने गुलाब के फूल की टहनी भेंट की छात्र बोला गुरूजी इसमें कांटे लगे हैं हाथ में चुभेंगे शिक्षक ने उत्तर दिया चि...
Tuesday, April 3, 2012
निरंतर कह रहा .......: बिना अभिमन्यु बने चक्रव्यूह नहीं टूटेगा
निरंतर कह रहा .......: बिना अभिमन्यु बने चक्रव्यूह नहीं टूटेगा: कहीं खो गया हूँ खुद को भूल गया हूँ सब की सोचते सोचते खुद भटक गया हूँ आत्मविश्वास से डिग गया हूँ अनिश्चय के भंवर में गोते लगा रहा हूँ...
निरंतर कह रहा .......: ये आवश्यक तो नहीं
निरंतर कह रहा .......: ये आवश्यक तो नहीं: ये आवश्यक तो नहीं हर पेड़ पत्तों से भरा हो हर पेड़ छाया प्रदान करे हर पेड़ पर कली खिले पुष्प बन कर सुगंध से महके क्या हम उस पेड़ को काट देत...
Tuesday, March 20, 2012
निरंतर कह रहा .......: बिना माँ के
निरंतर कह रहा .......: बिना माँ के: साधन संपन्न , धनाढ्य ने कमरे की खिड़की से घनघोर बरसात का आनंद लेते हुए देखा माँ स्वयं भीग रही थी पर पुत्र के सर पर छोटी सी छतरी ताने उसे बरस...
निरंतर कह रहा .......: थोड़ा तुम आगे बढ़ो,थोड़ा मैं आगे बढूँ
निरंतर कह रहा .......: थोड़ा तुम आगे बढ़ो,थोड़ा मैं आगे बढूँ: मैं रात में देर से सोता तुम कहती लाईट में नींद नहीं होती तुम भरती जोर के खर्राटे नींद मेरी भी उडती तुम पीती चाय ठंडी मुझे गर्म चाय अच...
Sunday, March 18, 2012
Nirantar's.......: A sick thought
Nirantar's.......: A sick thought: A sick thought Reflects Agony of the heart Turmoil of the mind Smile far away Laughter forbidden Irritation in behaviour Becomes call of t...
Nirantar's.......: When somebody smiles?
Nirantar's.......: When somebody smiles?: When somebody smiles? Think before you Return the smile First, assess Why one is smiling If it is a sarcastic smile Forget it If your belo...
निरंतर कह रहा .......: यह कैसी परीक्षा है ?
निरंतर कह रहा .......: यह कैसी परीक्षा है ?: यह कैसी परीक्षा है जिस में शिष्य परीक्षक गुरु परीक्षार्थी है अनुभव की प्रतिष्ठा दांव पर है जिसने सिखाया वो अब गौण जिसने सीखा वो महान है स...
Nirantar's.......: Ultimately
Nirantar's.......: Ultimately: Ultimately What will happen? The day shall come When everybody shall be Turned into dust and air Nothing will remain Except the name That ...
Saturday, March 17, 2012
निरंतर कह रहा .......: लाचारी में
निरंतर कह रहा .......: लाचारी में: एक जोर की किलकारी गूंजी एक जान ने धरती पर आँखें खोली सड़क किनारे लेटी माँ की आँखें खुशी से नम हो गयी अगले ही पल खुशी हवा हो गयी सोचने लगी न...
निरंतर कह रहा .......: प्रकृती और पर्यावरण से मज़ाक कब बंद होगा
निरंतर कह रहा .......: प्रकृती और पर्यावरण से मज़ाक कब बंद होगा: चेहरे पर तनाव लिए खामोशी से सब अपनी परेशानियों से झूझ रहे आधी उम्र में पूरा दिख रहे किसी को फ़िक्र नहीं हवा में धुएं का ज़हर बढ़ रहा खोल ...
Friday, March 16, 2012
निरंतर कह रहा .......: बोगेनवेलिया पुष्प तो बहुत सुन्दर होते तुम्हारे !
निरंतर कह रहा .......: बोगेनवेलिया पुष्प तो बहुत सुन्दर होते तुम्हारे !: बोगेनवेलिया पुष्प तो बहुत सुन्दर होते तुम्हारे लाल पीले सफ़ेद नारंगी और भी कई रंगों के दूर से ही लुभाते पास जाता हूँ तो कोई सुगंध नहीं पाता...
Thursday, March 15, 2012
निरंतर कह रहा .......: खोखली हँसी
निरंतर कह रहा .......: खोखली हँसी: पुरानी तसवीरें देखता हूँ सोच में डूब जाता हूँ उन हँसते हुए चेहरों को आसपास ढूंढता हूँ जो काल के गाल में समा गए कुछ चेहरे तो नहीं दिखते पर ...
निरंतर कह रहा .......: चेहरे
निरंतर कह रहा .......: चेहरे: मैंने देखे हैं भांती भांती के चेहरे कुछ अपने में डूबे दुनिया से बेखबर फूल से कोमल कुछ चिंता से ग्रस्त दुखों के पहाड़ तले दबे हुए कुछ ऐसे ...
निरंतर कह रहा .......: कम से कम सुन तो लो
निरंतर कह रहा .......: कम से कम सुन तो लो: जो कह रहा हूँ कम से कम सुन तो लो बोलने से पहले ही बिना समझे ही उत्तर तो मत दो सब जानते हो मन में धारणा मत बनाओ बिना सोचे समझे प्रतिक्रया त...
निरंतर कह रहा .......: मुझे गलतफहमियों से बचाओ
निरंतर कह रहा .......: मुझे गलतफहमियों से बचाओ: इससे पहले की तुम सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ जाओ शिखर पर पहुँच कर मुझे पहचानो भी नहीं मेरा मन को व्यथित करो तुम्हारे बारे में मेरी धारणा बदल ज...
Wednesday, March 14, 2012
निरंतर कह रहा .......: जीवन को नीरस ना बनाओ
निरंतर कह रहा .......: जीवन को नीरस ना बनाओ: जीवन को नीरस ना बनाओ नीरस जीवन वैसा ही होता जैसे बिना मुस्कान के होंठ बिना रौशनी के नयन बिना स्नेह के दिल बिना हरीतिमा के पृथ्वी...
अपनी भूल को स्वीकार करना
अपनी भूल को स्वीकार करना ,आने वाले कई कष्टों का निवारण कर सकता है,एक भूल को छुपाने में कई और गलतियां निश्चित रूप से होंगी ,पता चलने पर इंसान अपने आप को दूसरों की आँखों में तो गिराएगा ही,स्वयं भी अपराध बोध से ग्रस्त रहेगा.
14-03-2012
'' दुख और चुनौती ''
दुःख का आना ही एक चुनौती है,जीवन में कोई भी ऐसा नहीं होगा ,जिसका जीवन में दुखों से पाला नहीं पडा होगा यह जानना सबके लिए आवश्यक है
दुःख के समय में अपने को कैसे सुद्रढ़ बनाएं रखें,भावनाओं को कैसे नियंत्रण में रखें,मन को कैसे सुव्यस्थित रखें
परिस्थितियों के अनुसार दुखों से लड़ना सीखें.यह सब जानने और सीखने के लिए अनुभवी और परिपक्व मनुष्य से सहायता एवं मार्गदर्शन लेना चाहिए
दुःख के समय उत्तेजित होने या घबराने से उनका निवारण नहीं हो सकता है.
दुःख के समय में अपने को कैसे सुद्रढ़ बनाएं रखें,भावनाओं को कैसे नियंत्रण में रखें,मन को कैसे सुव्यस्थित रखें
परिस्थितियों के अनुसार दुखों से लड़ना सीखें.यह सब जानने और सीखने के लिए अनुभवी और परिपक्व मनुष्य से सहायता एवं मार्गदर्शन लेना चाहिए
दुःख के समय उत्तेजित होने या घबराने से उनका निवारण नहीं हो सकता है.
14-03-2012
Subscribe to:
Posts (Atom)